---(श्वेता सिंह )

शाम के समय दरवाजे पर दस्तक हुई तो दलित व्यक्ति ने दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही वह हक्का - बक्का रह गया क्योंकि उसके सामने भारी - भरकम लाव - लश्कर के साथ स्वयं उसके प्रदेश का मुखिया रात्रिभोज के लिए उपस्थित था।

----(श्वेता सिंह )

संत का नाम आते ही हमारे जेहन में एक ऐसी छवि उभरकर सामने आती है ; जो लोगों के दुःख - दर्द को दूर कर उन्हें सत्य का मार्ग बताता है।

---( श्वेता सिंह )

क्या खबरें चुन - चुनकर लाने वाली एक लड़की भी कभी डर सकती है? लोग इसका जवाब शायद 'न' में ही देंगे। समाज में घटित होने वाली घटनाओं को सबके सामने खबरों के रूप में लाने वाली एक पत्रकार ;

--( श्वेता सिंह )

‘‘अप्रैल फूल बनाया , तो तुमको गुस्सा आया।

इसमें मेरा क्या कसूर , जमाने का कसूर,

जिसने दस्तूर बनाया , अप्रैल फूल बनाया।‘‘

( श्वेता सिंह )  

राजनीति एक बहुत ही व्यापक और किसी भी देश को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक अत्यंतआवश्यक अंग है। राजनीति में महिलाओं की स्थिति प्रस्तुत करता आलेख -

( श्वेता सिंह )

“कई फूल चाहिए एक माला को बनाने के लिए ,

कई दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए ,

कई बूंदे चाहिए समुद्र बनाने के लिए ;

लेकिन " औरत " अकेली ही काफी है,

इस धरती को स्वर्ग बनाने के लिए।”

 ( श्वेता सिंह )

नोबल पुरस्कार विजेता प्रो. सी. वी. रमन ( चंद्रशेखर वेंकटरमन ) ने 1928 को कोलकाता में रमन - प्रभाव नामक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी और इसी दिन को यादगार बनाने के लिए 1986 से प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।